मध्य प्रदेश के सागर जिले के लोहे के व्यापारी मनोज गुप्ता जब वर्षों पहले शिशु मंदिर विद्यालयों से जुड़े हुए थे तो उन्हें एक चीज ने बड़ी टीस दी थी। वो ये कि जब विद्यार्थियों से मासिक स्कूल फीस के लिए कहा जाता तो अगले दिन वो अपने कक्षा अध्यापक से आकर कहते, ”पिताजी नेकहा है कि फसल तैयार होने पर उसे बेचकर सारे महीने की फीस एक ही साथ दे देंगे।”
मनोज गुप्ता को यह बात बड़ी कचोटती कि जो आदमी आदमी की सबसे आवश्यक जरूरत अनाज का उत्पादन करता है, जिसके बगैर आदमी के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती, उसे अपने बच्चे की फीस भरने और नई धोती खरीदने के लिए छ: महीने तक इंतजार करना पड़ता है। अन्य लोगों की तरह उसे हर महीने क्यों नहीं