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Sunday, February 27, 2011

टाल क्षेत्र - मसुकदाना की खेती से किसान खुश

टाल क्षेत्र के किसान कल तक कम पैदावार होने और लागत भी न निकल पाने की शिकायत कर रहे थे, लेकिन अब वे परंपरागत खेती को बाय-बाय कहकर नई खेती अपना रहे हैं. मोकामा-टाल के अधिकांश किसान भले ही आज भी क्षेत्र के एक फसली और टाल योजना लागू न होने का

पिपलांत्रीः जगमगाती गलियां और वातानुकूलित पंचायत भवन

उदयपुर से तक़रीबन 70 किलोमीटर दूर राजसमंद ज़िले में एक ग्राम पंचायत है पिपलांत्री. 16 सौ की आबादी वाली यह ग्राम पंचायत विकास के नित नए सोपान रच रही है. अरावली की संगमरमर की पहाड़ियों पर बसे पिपलांत्री को देखकर गर्व होता है कि भारत गांवों का देश है और अब गांव भारत के लोकतंत्र को सही मायनों में परिभाषित कर रहे हैं. यह यहां के लोगों द्वारा मिलजुल कर लिए गए फैसलों का ही नतीजा है कि पिछले कई सालों से सूखे की मार झेल रहे पिपलांत्री की पहाड़ियों से मीठे पानी के

गोपालपुरा: सामूहिक निर्णय प्रक्रिया से बदली तस्वीर



राज्य कभी नहीं चाहता कि समाज एकजुट, मज़बूत और आर्थिक रूप से संपन्न हो. वह हमेशा चाहता है कि समाज बंटा रहे, टूटा रहे, इस पर आश्रित रहे और गुलाम मानसिकता में जीना सीख ले. यहां तक कि गुलामी के दिनों में भी समाज के मामलों में राज्य का इतना हस्तक्षेप नहीं था, जितना स्वतंत्रता के बाद लोकतांत्रिक भारत में बढ़ता चला गया. अब तो समाज व्यवस्था को छिन्न-भिन्न कर दिया गया है और राज्य ही समाज का स्थान

मुस्‍कराएं, आप बख्‍तावरपुरा , झुंझनू में हैं


ग्रामसभाओं की निष्क्रियता के कारण सरकारी पंचायतों में काफी भ्रष्टाचार है. ग्रामसभा के नाम पर कुछ लोगों के हस्ताक्षर करा लिए जाते हैं और खानापूर्ति हो जाती है. वास्तविक ग्रामसभा बैठती ही नहीं है. लेकिन देश के कुछ ऐसे गांव हैं, जो इस स्थिति को बदलने की कोशिश में लगे हुए हैं. वे पंचायत के प्रस्तावों की समीक्षा कर रहे हैं और कोशिश कर रहे हैं कि ग्रामसभा को मज़बूत बनाया जा सके, ताकि सरकारी प्रस्तावों की ठीक-ठीक समीक्षा हो और अनुचित प्रस्ताव पारित न हो सकें. नतीजतन, इन प्रयासों के परिणाम भी दिखने लगे हैं. अब पंचायतों के जन प्रतिनिधि एवं कर्मचारी

गंगादेवी पल्‍ली में बही विकास की गंगा


आंध्र प्रदेश के वारंगल ज़िले की मचापुर ग्राम पंचायत का एक छोटा सा क्षेत्र था गंगादेवी पल्ली. ग्राम पंचायत से दूर और अलग होने के चलते विकास की हवा या कोई सरकारी योजना यहां के लोगों तक कभी नहीं पहुंची. बहुत सी चीजें बदल सकती थीं, लेकिन नहीं बदलीं, क्योंकि लोग प्रतीक्षा कर रहे थे कि कोई आएगा और उनकी ज़िंदगी संवारेगा, बदलाव की नई हवा लाएगा. क़रीब दो दशक पहले गंगादेवी पल्ली के लोगों ने तय किया कि वे ख़ुद एकजुट होंगे और बदलाव की हवा स्वयं लेकर आएंगे, जिसका वह अब तक स़िर्फ इंतज़ार कर रहे थे. आज गंगादेवी पल्ली एक प्रेरणादायक